ई ओकर पहिल नइ दोसर नइ तेसर बियाह छलै ,मतलब ओ दूत्तियो नइ तित्ती वर रहै ।रंग गोर ,दूबरे-पातर उमेर लगभग पचास ,मुदा पैंतीसे-चालीस के लागै ।कतौ नोकरी करैत रहै ,बेशी काल गामे पर रहैत छलै ।खाए-पीबै ,स्वागत-सत्कार ,मारि-पीट ,गारि-घिनाउज सब मे तीनू कनियां क' तुलना करए ।कनियां जें कि किछु बाजथिन ,ओकर धियान चलि जाए पहिलुकी पर या बीच वाली पर ।आ बात होए किछु लटकेना दुकानक या फेर तरकारी क' या फेर बच्चा-धियापूता सभक इसकुलक आ महोदय मुसकियाइत रहथिन ।तहिना कनियां सँ बाता-बाती या फेर घिच्चम-तीरा होए आ पति गंभीर भ' जाथिन ,ओ रूकि के तुलना कर' लागथिन ,तहिना एक दिन र्इ भेलै कि दूनू प्राणी मे मारि-पीट भ' गेलै आ कनियां कान' लागलखिन जोर-जोर सँ ,मुहल्लाक किछु लोक सेहो तांक-झांक कर' लागलखिन ।लोक सब के बूझेलए कि आब या त' केशा-केशी हेतै या फेर कनियां किछु दिनक लेल भागि जेती ,मुदा कनियां सूतए लेल चलि गेलखिन आ पति फेर यादि कर' लागलखिन कि ऐ स्थिति मे दोसर कनियां कोना के कानथिन या फेर मारि-पीट करथिन या गारि-बात करथिन ।
मैथिली साहित्य आ मिथिलाक संस्कृति पर विमर्शक एकटा मंच ।प्राचीन गौरवशाली परंपराक पहचान आ नवीन प्रगतिशील मूल्यक निर्माण लेल एकटा लघु प्रयास ।
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Friday, 29 November 2013
Thursday, 28 November 2013
दरोगा जी आ पहिल एलबम
दरोगा जी क' पहिल एलबम रहेन ,एहनो नइ कि दरोगा जी के बुझाइत होनि कि ओ कुनो महान गायक छथिन ,तैयो हुनका नीक लागैत रहेन कि ऐ पर केओ हुनका सँ बात करै ।एकटा मीठगर स्केच बेरि-बेरि हुनका दिमाग मे आबै ,एहन स्केच जइ मे जबर्दस्त भीड़क समक्ष हुनकर कुनो प्रोग्राम चलि रहल हो या फेर एहन स्केच जइ मे कुनो महान गायक या संगीतकार हुनकर प्रशंसा करैत हो या फेर कुनो एहन पुरस्कार जेकर नामे टा सँ जगजगार भ' गेल हो ।
आ एहने मीठगर यादि कें पजियेने दरोगा जी गाम पर आबि गेला ।पत्नी जे भनसे -घर नइ थाना तकक काज मे पर्याप्त दिलचस्पी लैत रहथिन ,दरोगा जीक वेतने नइ घूस-घास तक के फरियाबैत रहथिन ,दरोगा जी कें कुनो अदृश्य लोक सँ बतियाइत या मुसकियाइत देखलखिन ,कनियां बूझि गेलखिन जे दरोगा जी कुनो राग मे फँसल छथि ।पता नइ राग क' कोन स्वर पर भसियाइत या सम्हरैत ।
कनियां चाय आनैत माहौल के बदलबाक प्रयास केलखिन ' ई कोन बात जे हरदम पागल जेंका हवा सँ बतियाइत रहैत छी ,नीक बात अछि जे गाबै छी ,त' महीना मे या फेर हफ्ता मे गाबि लेल करू ,र्इ कोन बात कि हरदम नकियेने जा रहल छी '
दरोगा जी पहिले कनियां क' शिक्षा ,फेर कनियांक बाप-माए ,नाना-नानी क' शिक्षा ,गाम ,टोल आ परोपट्टा क' शिक्षा कें गरियाबैत चाय दिस देखलखिन ।कनियां सेहो जोश मे रहथिन ,स्पष्ट कहलखिन जे 'अहां सनक गायक खेते-बथाने बौआइत अछि ,यदि भगवान एकटा छोटछीन नौकरी नइ देता तखन सब राग आ ताल नीचा-उप्पर बाटे निकलि जाएत ।'
दरोगा जी पहिले कनियां क' शिक्षा ,फेर कनियांक बाप-माए ,नाना-नानी क' शिक्षा ,गाम ,टोल आ परोपट्टा क' शिक्षा कें गरियाबैत चाय दिस देखलखिन ।कनियां सेहो जोश मे रहथिन ,स्पष्ट कहलखिन जे 'अहां सनक गायक खेते-बथाने बौआइत अछि ,यदि भगवान एकटा छोटछीन नौकरी नइ देता तखन सब राग आ ताल नीचा-उप्पर बाटे निकलि जाएत ।'
दरोगा जी फसाद सँ बचबा लेल दलान दिस विदा भेला ।ओमहर पक्षी सब अपन वाद्य बजबैत खोंता दिस आबैत रहै्........;;
Monday, 25 November 2013
चक्का ,पुचकारी आ एंग्री बर्डस
Saturday, 23 November 2013
ऊ
ओकर ट्रांसफर भेल रहै ,ट्रांसफर ट्रांसफर होइ छैक ,मुदा ओकर दुश्मन कहै
'हयौ भाय ई ट्रांसफर सधारण ट्रांसफर नइ ,कत' सार पटना मे राज करैत छल ,आ
कत' रोसड़ा आबि गेल ' ,मुदा ओ कहै कि ई त' संपादक जी क' खास कृपा कि हमरा
रोसड़ा क' देला नइ त' दोसर के त' लखनऊ ,कलकत्ता सँ कम दूर संभवे नइ बूझू
।ई समै छलै जखन रोसड़ा सन बजार मे एकर खूब चलती ।एस0डी0ओ0 आ डी0एस0पी0
साहेब कें बूझाइत रहेन जे शहर मे कुनो अरस्तू आबि गेलै ,कुनो कालिदास ।आ
पत्रकार महोदय कहथिन कखनो कि सब आदमी चलै चलू गंडक नदी के साफ करबा लेल तखन
पूरा शहर हाथ मे कोदारि आ छिट्टा नेने बाहर आबि जाइ ,कखनो पत्रकार महोदय
कहथिन सब गोटे पानि बचबू आ ई शहर जत्त' जमीनक एक हाथ नीच्चा मे
पानिए-पानि रहै ,पानि कें एनाके जोगाबै कि
लोक सब के मूतएओ मे परेशानी होइत रहै । आ शुरू-शुरू मे ओ जे कहै हम ओतबे
बूझियइ ,बाद मे बहुत रास गप्प सब छोट शहर मे उधियाई जेना पानि कम भेला पर
माछ सब उधियाइ छइ । हम कतबो प्रयास करी तैयो एक-दू टा माछ हमरा लग आबिए जाइ
।मुकुंद बाबू कहथिन हयौ भाय ,पटना मे रहै एगो छौड़ी ,आ छौड़ी की रहतै बूझू
जे एकदम बजारू माल ,से एकरा मे सटि गेलै आ ईहो सार आन्हड़ कुकुर जँका
ओकरा मे सटि गेलै ।एक दिन पत्रकार महोदय आ ओइ छौड़ी कें अन्हार-मून्हाड़
कें केओ बान्ह कात मे बैसल देख लेलकै ।पत्रकार महोदय कहैत रहथिन कि बान्ह
पर आलेख तैयार क' रहल छी ,दोसर दिन छौड़ी के स्कूटर चलबैत आ पत्रकार बंधु
के पाछू मे बैसल देखल गेलै ,पत्रकार महोदय कहलखिन जे बहेड़ी मे तेल जमीनक
नीच्चा मे मिललै अछि सएह के समाचार बनेबा लेल बरियाही दिस जा रहल छी ।आ
पत्रकार महोदय हमर दोस रहथिन ,एक दिन साहस क' के हमहूं पूछबा लेल विदा
भेलौं ,बहुत साहस करैत पूछलौं त' अलगट्टे कहला कि ऐ बात-विचार के फैलाबै मे
महन मोहनक दोष ,किएक त' ओ सार कतौ आर ठाम काज करैत अछि आ जखन ई बातक पता
चलि गेलै ,त' सार एहने-एहने बात सब फैला रहल अछि ।बात शहर क' बाउंडरी पार
करैत समस्तीपुर दरभंगा रेड़' लागलै ,स्थानीय संपादक सेहो पूछलखिन ,हुनको
एहने गोलमोल जबाव मिललेन ।एक दिन एगो पत्रकार जे हुनका पर धपाएल रहै से
फोटो खींच के भेज देलकेन ,पटना सँ स्पष्टीकरण मांगल गेलै ।बात सब गेनहाइत
रहै ,मुदा पत्रकार महोदय निर्लज्जतापूर्वक ऐ संबंध कें पत्रकार-पत्रकार
संबंध कहैत रहलखिन ।छौड़ी कें बाप कें कहथिन जे हमरो बापे बूझू आ छौड़ी कें
कहथिन जे उमेर त' बस एकटा नंबर थिकै ।छौडि़यो ऑफिस मे कम हुनका घर पर बेशी
रहै ,स्कूटी दस बजे साहेबक घर पर लागि जाए आ साहबो पैखाना-पेसाबक बहन्ने
एकआध घंटा पर हूड़हूडि़या छूबा लेल डेरा दिस जरूर विदा भ' जाथिन ।एखन
रातिक बारह बाजि रहल छैक आ पत्रकार महोदय ऐ चिंता मे एखन व्यस्त हेथिन कि
काल्हि कोन झूठ छौड़ी सँ ,कोन झूठ ओकरा बाप सँ आ कोन झूठ ऐ शहर सँ बाजबै
।दोसर दिस कतेको आदमी ऐ जोगाड़ मे जागल छैक कि आइ ऐ पत्रकार कें कोना
नांगट क' देल जाए ।
Friday, 22 November 2013
खट्टाचूक
बस स्टैंड पर प्रतीक्षा करैत युवा दम्पति आ संग मे चारि टा बच्चा
,बच्चा क' उपस्थिति ऐ बातक साक्ष्य कि ओ दम्पति छथि ।चारि टा बच्चा ऐ
बातक प्रमाण कि युवा दम्पति ओतबो युवा नइ रहलखिन ।छठिक भीड़ ,रोड ,बजार आ
स्टेशन ,स्टैंड पर जकथक आदमी ।दम्पति मे पुरूष अपन सासुर आ स्त्री अपन
नैहर सँ विदा होइत ।स्वाभाविक रहै जे मोटा-चोटा क' अकार बढि़ गेलै ।बस
दरभंगा सँ चलतै ,समस्तीपुर मे किछु पसिंजर के बैसेतए आ रांची लेल विदा भ'
जेतै ।बस वला चारिए बजे बजेने छलै ,फेर कहलकै सवा पांच आ अखन सात बाजैत छलै
,मुदा बसक कुनो अता-पता नइ छलै ।आदमी क' संख्या छह आ सीट दू टा ,दू टा
स्लीपर आ दूटा स्टूल ।बस मे स्टूल सीटक आविष्कार बिहारे मे भेलै आ पुरूष
ऐ स्टूल सीटक प्रकृति आ रौतका हिल्लमडोलक कल्पना करैत मुंह बिचका रहल
छथि ,हुनकर ध्यान सात-आठ सालक बेटीक मांग पर टूटैत अछि ,मांग माए सँ छैक आ
अंचारक ।जाइत काल माए एक बूइयाम अंचार सनेस द' देने छथिन ,बुचिया देख नेने
छैक ।पिता अंचारक मांग पर आंखि गुर्रैत छथिन ।हुनकर क्रोध अंचारो पर
,बेटियो पर आ कनियो पर छैन ,शायत सासुओ ,सासुरो पर आ छठियो पर ।साहस जुटबैत
कनियां अंचारक सनेस खोलैत एकटा फांक बुच्ची के दैत छथिन ,पति दोसर दिस
देखैत भनभनाबैत समै काटैत छथिन आ एमहर कनियां अपन बेटी के खट्टाचूक होइत
मुंह मे अपन नेनपन देखैत मुसकियाइत छथिन ।
Saturday, 16 November 2013
रे खरहा
देखियौ ने रंग कत्ते दकदक
(रंग पर नइ जो वौआ)
आ कान केहन ठार छै
देह मे पानि त' देखियौ
खन एत्त' खन पार छै
(प्रशंसा लेल नइ मर)
(रंग पर नइ जो वौआ)
आ कान केहन ठार छै
देह मे पानि त' देखियौ
खन एत्त' खन पार छै
(प्रशंसा लेल नइ मर)
जाग जाग खरहा ,मोंख पर मोटका बिलार छै
धूरी
चारि भाई छलौं ,तीन गोटे बाहर चलि गेला कमाई-खटाई लेल ।ई कमाई-खटाई
शब्द हमर नइ हुनके छी ।कमाके टाल केने छथि ,मुदा ओतबे विनम्र ।विनम्रता क'
पाछू चलाकी ई कि केओ मांगि न दए ।हरदम लोने क' चर्चा करता ,हरदम बीमारिए
क' ,हरदम घाटा क' चर्चा करता ।अपने नइ कनियां आ छोट-छोट बच्चा सब सेहो
एकदम रटल-रटाएल पटकथा आ संवाद तक रहता ।
आब आबी असली चर्चा पर ।तीनू गोटे चलि गेला गाम छोडि़ कें ,कहि के ई गेला कि अहां के करोड़ रूपया क' संपति आ ईज्जत-प्रतिष्ठा देने जाइत छी ।आ बाबू ,ई करोड़ टका एहन खतरनाक भेल कि पूछू नइ ।तीन-तीन ,चारि-चारि पुश्तक पुरान कुटुम सब आबि जेता आ बिना हफ्ता बितेने हटता नइ ।जत्ते कुटमैती क' जंजाल ,बहिने नइ दीदी आ पितामहक बहिन सब जंजाल हमरे पर ।नानी गांव आ हमर बापक नानी गांव आ बापे नइ पितामहक ननियौत सब सेहो फरिछौट करबा लेल हमरे ओहि ठाम एता ।आब बूझू जे गाम मे रहनै मोश्किल ।
आब आबी असली चर्चा पर ।तीनू गोटे चलि गेला गाम छोडि़ कें ,कहि के ई गेला कि अहां के करोड़ रूपया क' संपति आ ईज्जत-प्रतिष्ठा देने जाइत छी ।आ बाबू ,ई करोड़ टका एहन खतरनाक भेल कि पूछू नइ ।तीन-तीन ,चारि-चारि पुश्तक पुरान कुटुम सब आबि जेता आ बिना हफ्ता बितेने हटता नइ ।जत्ते कुटमैती क' जंजाल ,बहिने नइ दीदी आ पितामहक बहिन सब जंजाल हमरे पर ।नानी गांव आ हमर बापक नानी गांव आ बापे नइ पितामहक ननियौत सब सेहो फरिछौट करबा लेल हमरे ओहि ठाम एता ।आब बूझू जे गाम मे रहनै मोश्किल ।
छठि मे आ होली मे भाय सब सेहो पिकनिक मनेबा लेल
पहुंचता ,हुनकर स्वागत मे कुनो कमी नइ रहि जाय ई हमर जीवनक सर्वश्रेष्ठ
कर्तव्य आ कुनो गुंजाइश रहि जाय त' मृत्युदंड तक कमि जेतै हमरा लेल
।तहिना भाउज आ भावहु सब ,टीकमगढ़क रानी हुनका लग मे उन्नीस भ' जेती
।भतीजा-भतीजी सब सेहो बेस ठुनकौआ ,सब सख गामे ल' के एता ।
कहबा लेल ई कि हम धूरी छी ।हमरे पर सबक नाचनए ।हमहीं सबक केंद्र ,समस्त परिधि ,विस्तारक मूल विंदू हमही ।वाह रे वाह ,ई साहित्यिक भाषा वौआ दोसर कें कहियहीं ,बहुत रास थोपड़ी आ वाह-वाह मिलतौ ।सब सहबाक लेल हमहीं ,सब भोगबा क' लेल हमहीं ,तों सब बस भोजक निमंत्रित आ हम हरदि-हींग सँ ल' के पात-पानि तक सबक ठीकेदार ।एतबे नइ तोरा सब कें गेलाक बाद पात फेकबाक जिम्मेवारी सेहो हमरे ।आ यदि नइ फेक सकब त' ओइ विषेन गंध सँ के बचायत हमरा ।
कहबा लेल ई कि हम धूरी छी ।हमरे पर सबक नाचनए ।हमहीं सबक केंद्र ,समस्त परिधि ,विस्तारक मूल विंदू हमही ।वाह रे वाह ,ई साहित्यिक भाषा वौआ दोसर कें कहियहीं ,बहुत रास थोपड़ी आ वाह-वाह मिलतौ ।सब सहबाक लेल हमहीं ,सब भोगबा क' लेल हमहीं ,तों सब बस भोजक निमंत्रित आ हम हरदि-हींग सँ ल' के पात-पानि तक सबक ठीकेदार ।एतबे नइ तोरा सब कें गेलाक बाद पात फेकबाक जिम्मेवारी सेहो हमरे ।आ यदि नइ फेक सकब त' ओइ विषेन गंध सँ के बचायत हमरा ।
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