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Saturday, 27 October 2012

भादो छिनाडि़


जहि तहि चाली , जहि गनगुआरि
भाभट सम्‍हारू ,हे भदवारि
केहन सुपत साओन ,आसिन कुमारि
बीचे मे घुसि गेली ,दाइ भदवारि
डूबल सब बाध वन ,उूबल सब आरि
...
तैयो भरोसे मे छुन्‍नूक सारि
गनहाबै गाम घर डरबै बिहाउि़
हाहा कट विकट करै वारि भदवारि
गलि गेल कोदो सामा मड़ुआ जनेर चारि
भूक्‍खल ई टुकुर टुकुर ताकै बकरी दुआरि
मलमासक मस्‍ती मे सुस्‍ताबैत देव पितर
साहस छै ककरा ई कहतै भादो छिनाडि़

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