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Saturday, 4 February 2012

**गजल**

‎ हम बाजि रहल छी मायक कोखि सँ ,
हम सबटा सुनै छी बेशक कोखि सँ ,
कष्ट सहब हमर नियती बनल ,
मल- मुत्र खून सहै छी मायक कोखि सँ ,
मारि देब पहिल तीन बहिन जेकाँ ,
सुनि हँसि रहल छी मायक कोखि सँ ,
बेटी कए जौ मारबै यौ भलमानुष ,
बेटा जनमत कोन मायक कोखि सँ ,
हम बेटी छी दुर्गा छी सुनि लिअ अहाँ ,
आइ हुंकार भरै छी मायक कोखि सँ ,
बेटी कए जे केउ सम्मान नै करत ,
नै जनमS चाहब ओ मायक कोखि सँ ,
बेटी बिन बंश ककरो त' नै बढ़तै ,
जारि क' बंश मरै छी मायक कोखि सँ . . . । ।

2 comments:

  1. बहुत नीक अमित जी

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  2. bahut neek....kash sab Mae-Baap ehi gupp ke bujhi jaitaith..

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