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Saturday, 8 March 2014

तितली आ मौधमाखी

सत्‍त बात कि एकाधिक भाषा सँ प्रेमक प्राचीन अपराध हमहूं केने छलौं
सत्‍त बात कि अपने ईनार नइ दोसरोक ईनार क'लक पानि छकि के पीलौं
सत्‍त बात कि जेहने अपन चौरस खेत तेहने दोसरोक नाशी,डोबहा लागल
जेहने गामक चर-चांर ,तेहने बाहरक पहाड़ लागल
हे कवि अहांक वर्णशंकर गारि स्‍वीकारै छी
मुदा अहां के एहन कखनो लागल
नइ ने..... नइ ने...... नइ ने
आब एकटा आर सत्‍त सुनाउ
अपन माएक कोखि मे आबैे सँ पहिले रहियै ठार कैमरा ल' के
या रहियै स्‍केच करैत ओइ दिनक जहिया सँ अहांक पेट मे गिनती भेल प्रारंभ
हे भाषाक सोइत संत
के राखै छैक खूनक हिसाब
के जानै छैक देहक गति
के रोकै छैक भाषाक बहाव
के जोड़बै दिवाल हवा बसातक खातिर
चिन्‍हबै फूलबारिए ने
कि रोकबै तितली आ मौधमाखी के

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