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Friday, 1 February 2013

यात्री 1

कवि नइ कारीगर
लगेने सूत्‍ता गुनिया देशदुनियाक नक्‍शा पर
चलबैत आरी दुवृत्ति पर
बौंसला सँ छीलैत
युग-युग सँ बैसल डाढ़ी
मांजैत कारिख
धोइत फेर धोइत
पुरूखाक कलंक
आ ठोकैत कील्‍ली
सभ तरहक छुटपन पर
एकटा सामंतवाद पर
दोसर राजसत्‍ताक नरहेरपन पर
तेसर भेडि़याधँसान पर
चारिम साहित्‍यक फूलकारी पर
पांचम भीतरक मक्‍कारी पर
दे मरिया दे मरिया
खन तरौनी खन झरिया
आ वौआ तु गानैत रह
अपन गुरू आ गॉडफादरक  संग 
हुनकर कवितासंग्रहक नाम आ संख्‍या
जखन कि ओ
कोनो कविते नइ ...........लिखलखिन
कहां रहथिन कवि यात्री
ओ त' बस कारीगर रहथिन



















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