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Wednesday, 23 January 2013

पता नइ ओ कत्‍ते

पता नइ के राखि देलकै
सुक्‍खल सुक्‍खल चेरा
पता नइ के छुआ देलकै
एकटा लाल लुत्‍ती
फूंकैत फूंकेत चेरा
के बनेलकै आगि लाल
आ ओ राखि देलखिन
आगि पर चिक्‍कन बासन
हम राखि देलियै रंगहीन पानि
ओ बदलि देलखिन रंग दूध सँ
हम गिरा देलियै तितका पत्‍ती
धधका सँ उधियाबै पानि दूध
ओ आंच कम क' देथिन
सुसुम द्रव महक' लागलै
हुनकर दछिनी सँ
हम निसरठ फेर
गिरा देलियै आदी आ मरीच
आगि फेर सोखलकै
मीठ तीत आ करू के
जे बनलै
ओइ मे जत्‍ते हम्‍मर
ओत्‍ते ओकरो पसेना
आ पीबिते ओकरा
हम भरि देन र‍हलियै
स्‍नेह सँ गरमायल
पता नइ ओ कत्‍ते
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