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Monday, 5 December 2011

बियाह आ मोंछ

ओ बियाह नइ ,मोंछक लड़ाई छलई
आ सभक अपन अपन प्‍लान रहए
बाबू ,मॉ ,दोस ,सासु ससुर
संस्‍कार कम ,नाच बजार छलइ ।
 बाबूए पढ़ेने लिखेने रहथिन
तें बियाह हुनके पसिन्‍नक जगह ,लड़की आ तिथि के निश्चित छलए
भैयाक लेल ई छलए अचूक मौका
साबित करबाक लेल बहुत रास चीज
तें केवल नवका चमचम गाड़ी क जखीरा रहए
आ यदि ऐ साल बियाह नइ हेतइ
तखन बाबू क मोंछ आ माथ नीचा भ' जेतेन ।
यदि हम काजर लगेबा सँ रोकबा क प्रयास करतियइ
तखन जनानी सबक नजरि मे
मॉ बहुत छोट भ' जेतइ
आ ससुर महराज सेहो लगेने रहथिन बाजी ककरो सँ
तें दिसम्‍बर पक्‍का रहए
आ ने हमर उमेर कम रहए
ने हम बेरोजगार रहियइ
तें ससुरक ससुर जांच करबा लेल पहुंच गेलखिन
बागमती सँ केन
कहीं कोनो जनानाक चक्‍कर त' नइ छइ
आ बियाह मे जरूरी रहए दारू पीनए आ नाचनए
किएक त' वीडियो गड़बड़ा जेतइ
आ धियान देने रहए बहुत लोक गिद्धो सँ बेशी
हम हुसियइ
आ ओ प्रारम्‍भ करए ।

2 comments:

  1. bahoot nik rachna khash k desh or gear viyah or mochh

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