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Saturday, 1 December 2018

चिक्‍कस मे पानि दए काल मे बुद्धि छन्हि ,जानै छथिन सोहारी लेल कत्‍ते पानि आ पुआ लेल कत्‍ते ,मुदा कविता लिखै काल बहि जाइत छथिन ।मिथिला पर लिख' लागला त' फलां मिथिला ,चिल्‍लां मिथिला ,वैह मिथिला ,जैह मिथिला ,अरे मरदे कनि थमि के ,दम धरू ,जग्‍गह देखि के चिकरियौ ,जग्‍गह देखि के सम्‍हरियौ ,जग्‍गह देखि के पोचकारा दियौ ,आ जग्‍गहे पर टीटकार .........

ईह

ईह ,हिनके केवल छन्‍दक छल्‍ला
यैह अलगाबैथ रीतिक कल्‍ला
तीती थूथू करिते करिते
धैन अनुप्रास मचाबैथ हल्‍ला
ध्‍वनियो कें अलगाबैथ पल्‍ला
की वक्रोक्ति ?
औचित्‍य कथी के ?
हिनके लेल सभ भेल बेलल्‍ला
विदा भेलै अनुपात ए‍त' सँ
कनमा तीमन बेस मसल्‍ला

हे राम अहां केर रामकथा

देशभक्ति गीत
हे राम अहां केर राम कथा ,हे कृष्‍ण अहां केर कृष्‍ण कथा
भारत के नाम बढ़ौने छथि भारत के नाम बढ़ौने छथि
दूनू भारत भूमि मे जन्‍म लेलथि ,भारत के शक्ति बढ़ौने छथि
भारत के शान बनौने छथि भारत के शान बनौने छथि
गंगा-जमुना तट कावेरी ,कृष्‍णा केर पावन तट स्थित
जत' मुनिजन ध्‍यान धरौने छथि भारत के नाम बढ़ौने छथि
उत्‍तर मे वीर हिमालय के ,नदीगण सब पैर पखारै छथि
दक्खिन समुद्र अति महाबली ,दुश्‍मन के देख खेहारै छथि
बस यादि रहै लछमी बाई , गांधी ,नेहरू आ अंबेडकर
बस यादि रहै आजाद ,भगत ,इज्‍जत देशक रहै अक्षत
हे राम अहां केर रामकथा ,हे कृष्‍ण अहां केर कृष्‍णकथा
भारत के नाम बढ़ौने छथि भारत के नाम बढ़ौने छथि
बस हरियर खेतखरिहान रहै आ देशक सबल सीमान रहै
यैह शपथ अपन ,जय जन जीवन ,यैह शपथ अपन ,जय जन जीवन
हे राम अहां केर राम कथा ,हे कृष्‍ण अहां केर कृष्‍ण कथा
भारत के नाम बढ़ौने छथि भारत के नाम बढ़ौने छथि
(रामदाय पाठक

दूध जरेलखिन ऊ

दूध जरेलखिन ऊ
भरि डोल भोरका टटका
दहिना चललखिन ऊ 
ट्रक सटेलकेन हुनका
कंपनी बुरेलखिन ऊ
बौस डांटेलकेन हुनका
आंखि गमेलखिन ऊ
बौह डरेलकेन हुनका
त' कविता लिखथिन ई ?
जे केलखिन बस छोटका-बड़का
सुसाहित बूझथिन ई ?
जिनका मूने मे लटका-झटका
जौं तैयो ने मानथि ई ?
त' लाबू यौ करची के सटका
एगो बाजी राकस संग , जितलियै त रस्ता
हारलियै त भागू , राकसक गाम मे जान बड़ सस्ता
हम्मर तोहर हुनकर सबहक बाप
लेन्ने देन्ने गछने भरने काटरक पाप

हेमचंद्र

अकस्माते-अनचोके नै
बाध-बन पहाड़ नै
कुनो एकात नै 
हेमचंद्र क गाम नै
गुरुकुल क आंगन नै
एकदम राजप्रांगण मे
लेने रहथिन शप्पथ
तीन सहस्र विद्वानक बीच
कि अंतिम श्वास धरि
सेवार्थी रहब देववाणी के
त अचानके ई क़ोन सुर
भ सकै छै मोन बदलेन हुनकर
संभव छै दरबार क दबाव
ताप राजाक महसूस करथि महाकवि
हयौ राजा राजा होइ छै
विष्ठी तक खोलबा लेतेन राजा
हयौ विष्ठिए पहिर त आयल छलखिन हेमचंद्र
अर्जित कीर्ति ऐश्वर्य राजाक प्रसादे ने
आ हेमचंद्र गड़ैत चलि गेलखिन पताल मे
यदि बीख होइतै समक्ष
संग मे कुनो आत्मघाती औजार
यदि ऋण पूरा भ गेल होय
त बजा लैथ देव
समै क पएर मे घिरणी लागल रहै
जल्दी जल्दी उगथिन सूर्य देव
जल्दी जल्दी बदलै पतरा
एकदिन एकटा सूर्य हेमचंद्र क ह्रदयो मे उदित भेल
ई ज्ञानयोग ई भावयोग
भोगल एक एक क्षण
सभ प्रकृति केर दान
ने राजा के देल किछु
ने हमर-अहांक जोगायल
सभ किछु जनपद क आशीर्वाद