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Saturday, 1 December 2018

हे एत्‍ते प्रेम नै देखाबू

हे एत्ते प्रेम नै देखाबू कि
ढ़ंग सं झगरियो नै पाबी
हमर चालि-सुभाबक एत्ते प्रशंसा कि
कुनो अधजरल घूर के खोरियो नै सकी
हमर गामघरक लेल एहन सम्मान कि
हम बाजि नै सकी कुनो ऊंच-नीच
अहांक टोलक संबंध मे

(रवि भूषण पाठक)

कत्‍ते खुएलखिन दुलहीन

कत्ते खुएलखिन दुलहीन
कत्ते सहेलखिन
से त मनमे जानै...
अपना के बूझि बूझि समझदार
से सपनमो जानै....
कत्ते भेजलखिन मैसेज
कत्ते बरहेलखिन
से सजनमे जानै...
कत्ते कुन फोटो फाटो
केहन नाच गनमा
से परणमे जानै...

Monday, 29 April 2013

तोरा बिन

हवा मे उधियाइत छलौ तोहर अवाज
लोकपैरिया पर थोपल तोहर पएर
तोरा बिन तोहर गंध
तू नइ छलही कोहबर मे
साक्षी छलै चारा,कोरो आ देवाल
सभक ठोर आंखि मे ओतबे सिनेह
थारी मे आ परसन मे ओतबे अतिरेक
मुदा पता नइ किएक
तोरा बिन सासुरक दिन
बितने नइ बितैत छलैछलै

Wednesday, 23 January 2013

पता नइ ओ कत्‍ते

पता नइ के राखि देलकै
सुक्‍खल सुक्‍खल चेरा
पता नइ के छुआ देलकै
एकटा लाल लुत्‍ती
फूंकैत फूंकेत चेरा
के बनेलकै आगि लाल
आ ओ राखि देलखिन
आगि पर चिक्‍कन बासन
हम राखि देलियै रंगहीन पानि
ओ बदलि देलखिन रंग दूध सँ
हम गिरा देलियै तितका पत्‍ती
धधका सँ उधियाबै पानि दूध
ओ आंच कम क' देथिन
सुसुम द्रव महक' लागलै
हुनकर दछिनी सँ
हम निसरठ फेर
गिरा देलियै आदी आ मरीच
आगि फेर सोखलकै
मीठ तीत आ करू के
जे बनलै
ओइ मे जत्‍ते हम्‍मर
ओत्‍ते ओकरो पसेना
आ पीबिते ओकरा
हम भरि देन र‍हलियै
स्‍नेह सँ गरमायल
पता नइ ओ कत्‍ते
................................

Wednesday, 4 April 2012

प्रेमक हार

दिनहि पहिल बाधक भेल मान
बढ़थि चान बढि़ गेल अभिमान
मानक हरिण भेल खूंखार
प्रेमक शावक भेल शिकार
दिन पांचम छलबलबौकार
लुप्‍त विवेक छल अस्‍त विचार
हमर विजय आ प्रेमक हार

Sunday, 1 April 2012

नवराति

आइ तऽ पांचमे दिन
नवरातिक चारि दिन बचले बचल
मुदा नइ गिलाइत ई आलू ,सिंघाड़ा कऽ रोटी
आ सेंधा नमक मे सट्टल पाखंड
बूझऽ दे भूखक रंग
स्‍वाद लियऽ दे पानि के
थाहऽ दे अपन पेटक धैर्य
नापबें तऽ नापि ले
जलक कैलोरी मूल्‍य
मुदा साबूरदाना कऽ बात नइ कर
हम देखऽ चाहैत छियइ ओ व्रत
जे देशक कोटि कोटि जनता
बिना पतरे गुणेने राखैत छैक
पाप-पुण्‍यक कोन बात रहल
तमाशा तऽ खतम हेबे करतै
बस हम्‍मर झंडी कऽ इंतजार कर
प्रयोग जारी रहऽ दे
आब बचबे कएल कत्‍ते दिन ?

Tuesday, 27 March 2012

प्रतिज्ञा

प्रतिज्ञा बहुत रासक
सभक अपन अपन रंग
अपन अपन खून
अपन आगि पानि
प्रतिज्ञा केवल उपनेन दिनक कनफूंकाइए नइ
ईसकुल गाम समाज यात्रा क' प्रत्‍येक शिक्षा के निमित्‍त
प्रतिज्ञा केवल पितृऋण मे घोघचल कोना
सभक ऋण नितदिन दोबर तेबर होइत
गाम पोखरि किताब भाषा आ ब्रहमाण्‍ड मे पसरल
कखनो कखनो सप्‍तपदी क' प्रतिज्ञा हावी होइत
सभ ऋण सभ प्रतिज्ञा सभ सपना पर
छेटनगर दिमागक सभ प्रतिज्ञा
सानल माटि नइ मूरती सन
सभ प्रतिज्ञा मांगैत खून पसेना
समय आ निष्‍ठाक एकटा ठोस फांक
आ कखनो कखनो दू व्‍यक्तिक प्रतिज्ञा
दौड़ैत हिंसक मूद्रा मे
कखनो त' एके व्‍यक्ति क' दू प्रतिज्ञा
आमने -सामने
दूनू सँ जुड़ल कतेको दिन-राति
कथा कविता ............

Sunday, 25 March 2012

कंप्रेस्‍ड फाईल

सभ पूजा विधि विधाने सॅं नइ
आ विधिपूर्वक निमहि जाए
तैयो फलक गारंटी के देत
आ विधिए एकटा छैक की
तें रस्‍तो अपन अपन
जेकरा जइ मे संतोष
कहबा सुनबा बतेबा
गेबा गुणबा क ओते विधि
जत्‍ते धरती पर मूड़ी
आ कखनो त' एकेटा मूड़ी
तैयो दस रंगक कूड़ी
खने खन बदलै रंग
की ढ़ंग कोन बेढ़ंग
गणितक सब सवाल
उदाहरणे सँ हल होइत छैक की
आ यदि होइतो होए
तखन सब शंभूए बाबू
सन गणितभट्ट
होइ तखन ने
आ किछु फाईल कखनो ने
पूरा होइत छैक
आजीवन अपूर्ण
कखनो कंप्रेस्‍ड
कखनो रिज्‍यूमक मांग
आ सब फाईल मे
रिज्‍यूमक क्षमता नइ होइत छैक

Monday, 5 December 2011

बियाह आ मोंछ

ओ बियाह नइ ,मोंछक लड़ाई छलई
आ सभक अपन अपन प्‍लान रहए
बाबू ,मॉ ,दोस ,सासु ससुर
संस्‍कार कम ,नाच बजार छलइ ।
 बाबूए पढ़ेने लिखेने रहथिन
तें बियाह हुनके पसिन्‍नक जगह ,लड़की आ तिथि के निश्चित छलए
भैयाक लेल ई छलए अचूक मौका
साबित करबाक लेल बहुत रास चीज
तें केवल नवका चमचम गाड़ी क जखीरा रहए
आ यदि ऐ साल बियाह नइ हेतइ
तखन बाबू क मोंछ आ माथ नीचा भ' जेतेन ।
यदि हम काजर लगेबा सँ रोकबा क प्रयास करतियइ
तखन जनानी सबक नजरि मे
मॉ बहुत छोट भ' जेतइ
आ ससुर महराज सेहो लगेने रहथिन बाजी ककरो सँ
तें दिसम्‍बर पक्‍का रहए
आ ने हमर उमेर कम रहए
ने हम बेरोजगार रहियइ
तें ससुरक ससुर जांच करबा लेल पहुंच गेलखिन
बागमती सँ केन
कहीं कोनो जनानाक चक्‍कर त' नइ छइ
आ बियाह मे जरूरी रहए दारू पीनए आ नाचनए
किएक त' वीडियो गड़बड़ा जेतइ
आ धियान देने रहए बहुत लोक गिद्धो सँ बेशी
हम हुसियइ
आ ओ प्रारम्‍भ करए ।

Thursday, 1 December 2011

प्‍लेटो आ हमर कनिया

अंतत:
प्‍लेटो के योग्‍य शिष्‍या मिलिये गेलेन
हे मैथिलीक स्‍वर्गीय कविगण
बता देबेन प्‍लेटा के
ओ एकटा युवा महिला छथिन्‍ह
आ जहिना प्‍लेटो दोड़ैत छलथिन्‍ह
कविता दिसि राजदंड ल के
तहिना ललकारैत छथिन्‍ह ई
एकटा नवोदित कवि के
आ पूछैत छथिन्‍ह एकटा अस्‍थापित कवि सँ
की हेतओ ऐ कविता ल' के
 काज रोजगारि छोडि़
किएक बताह भेल छें
सजमनि छीलैत आटा सानैत
फोड़न दैत छौंकक मेंजन तैयार करैत
बच्‍चा के मुंह मे कौर दैत
नेटा कांची पोछैत
नाना प्रकारक मुखाकृति
भाव भंगिमा
खुसुर फुसुर
खौंझाइत बड़बड़ाइत
गारि गीत जँका
कखनो गायत्री मंत्र
कखनो सप्‍तशती
कखनो कोनो अतुकांत वैदिक ऋचा
अरबीक अबूझ नेमाज जँका ।
आ प्‍लेटा जे नइ क' सकला मंत्री पद अछैत बधाई प्‍लेटो ।
अहॉक योग्‍य शिष्‍य अरस्‍तू वा
हमर कनियां
। ओ निर्णय निकालि नेने छथि
एहिना फिफियाइत रहब
हिहियाइत रहब किछु देखने सुनने
ऐ दुनिया मे सब केओ अछि आ
दुनिया ढ़न्‍नूक लाल सॅ नइ चलैत अछि
मुदा ई दुनिया ढ़न्‍नुको लालक छैक ।

Sunday, 16 October 2011

चालीसक बात

तेरह साल पहिलेक बात छइ
 ओ सब
 ओ सब बात
 आब त हमहु चालीसक लगभगाएल छी
 तोहूं जरूर चौंतीस पैंतीसक भ गेल हेबें
 कहां पूछि सकलियओ तोरा सं कोनो बात
 आब त प्रश्‍नो सब बिसरि गेलहुं
 जे यादि केने छलियओ तोरा सं पूछए लेल
 हवा क साथ दइ वला केश हमर
 किछु उडि़ गेल
 किछु पाकिके डरा रहल अछि
 हंसीक साथ निकलइ वला धवल दांतक पांति
 किछु टुटि गेल
 किछु हिल रहल अछि
 तहिना गोरनार चमरो ई
 भेल कारी बदरंग
 तू केहन भ' गेलें
 कतओ देखबओ
 त कोना चिन्‍हबओ
 ई कहनए त बिसरिये गेलियओ
 हमरा दू टा बच्‍चो अछि
 तोरा कएक टा छओ
 आ तों कत' रहैत छें
 की तूहू हमरे जँका नौकरी करैत बनरा गेलें
 आबो सुनइ छें राति के रेडियो
 आ लिखइ छें पोस्‍टकार्ड
 की तोरो कोनो पता नइ छओ
 ई निरर्थक गद्य बस तोरे लेल
 तूही बूझबीही छंदक भयानक दुनिया मे
 तुकहीन पद मे छुपल
 एकटा नीरव एकांत अर्थ
(रवि भूषण पाठक)