मैथिली साहित्य आ मिथिलाक संस्कृति पर विमर्शक एकटा मंच ।प्राचीन गौरवशाली परंपराक पहचान आ नवीन प्रगतिशील मूल्यक निर्माण लेल एकटा लघु प्रयास ।
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Monday, 8 January 2018
Wednesday, 13 December 2017
राजकमल चौधरी आ मैथिली साहित्य
राजकमल चौधरीक जन्मदिन पर बहुत रास कवि ,साहित्यिक आ मिथिलाप्रेमी हुनका यादि क' रहल छथिन ,मुदा कि राजकमल कें पूरा निष्ठा आ समर्पण सँ यादि कएल जा रहल अछि ? कि साहित्य आ मैथिली साहित्य राजकमलक अवदान कें ह्रदय सँ स्वीकार केलकै? कि मैथिली साहित्य राजकमल चौधरीक सिद्ध कएल प्रमेय सँ आगू चललै ?कि मैथिल समाज साहित्यिक चेतनाक स्तर पर दू सदी पहिलुुके दुनिया मे त' नइ छैक ?लागै त' नइ छैक कि मैथिली साहित्य राजकमल चौधरी कें जज्ब करैत आगू बरहैक लेल प्रयत्नशील छैक ।मुख्यधाराक बहुलांश एखनो 'सस्ता लोकप्रियता' क कहाओत कें पूर्णत: आत्मसात करैत आगू चलि रहल छैक आ राजकमल द्वारा मैथिली साहित्य लेल कहल गेल सब बात दुर्भाग्यजनक रूप सँ एखनो शत प्रतिशत सत्त छैक । ;यद्यपि प्रतिभाशाली साहित्यिकक एकटा पीढ़ी सक्रिय छैक ,मुदा ऐ पीरहीक एकटा गुट या किछु कवि (नाउ लेेनै ठीक नइ) अपन वैचारिक शून्यता सँ भरल छथिन ,ओ किमहरो घूसकि सकै छथिन ,आ एकटा समूह सरल (सड़लो बूझबै त' कुनो खराब नइ )वैचारिक आ शैल्पिक सुविधाक उपयोग करैत मस्त छथिन ,यद्यपि दूनू खूब नामवर छथि ।अस्तु ,आब आबू ठाम पर....... अहां लेल सभागाछी क' जे महत्व होए ,राजकमल चौधरी एकरा एना यादि करैत छथिन----
सभागाछीमे आब लोक नहि
बैसत माछी
राजकमल चौधरी परम्पराक नाम पर घमर्थन ,पाखण्डबाजी ,असृजनशीलता ,निरर्थक पुनरावृत्तिक विरोधी छलखिन ,आ हिन्दी मे त' किछु प्रतिभाशाली लोकनि पहिले सँ सक्रिय छला ,मुदा मैथिली मे यात्री जी क' बाद राजकमल विशेष दायित्व आ भूमिकाक निर्वहण केलाह । पारंपरिक कविताक प्रति राजकमलक दृष्टि ऐ कविता मे स्पष्ट अछि---
हे शब्दक पुहुप-माल,
हे कविता कमल-काल,
भाषा मन्दिरक देवी पर चढ़ि बनि गेलाह तोँ निर्माल
आब तोहर नइँ आवश्यकता, एहि मन्दिरसँ टरि जाह
बैसत माछी
राजकमल चौधरी परम्पराक नाम पर घमर्थन ,पाखण्डबाजी ,असृजनशीलता ,निरर्थक पुनरावृत्तिक विरोधी छलखिन ,आ हिन्दी मे त' किछु प्रतिभाशाली लोकनि पहिले सँ सक्रिय छला ,मुदा मैथिली मे यात्री जी क' बाद राजकमल विशेष दायित्व आ भूमिकाक निर्वहण केलाह । पारंपरिक कविताक प्रति राजकमलक दृष्टि ऐ कविता मे स्पष्ट अछि---
हे शब्दक पुहुप-माल,
हे कविता कमल-काल,
भाषा मन्दिरक देवी पर चढ़ि बनि गेलाह तोँ निर्माल
आब तोहर नइँ आवश्यकता, एहि मन्दिरसँ टरि जाह
एतबे नइ विद्यापति कें संबोधित एकटा कविता मे अप्रत्यक्ष रूप सँ तत्कालीन समाज आ साहित्यिक वर्ग के संबोधित करैत कवि कहैत छथिन----
रतिविपरीत आ रतिअभिसारक लिखने छह कत गीत
आब न शृंगारक जुग छइ, ने छइ कतउ सिनेह पिरीत
युद्ध,अकाल, बाढ़ि, रौदीसँ अछि जनसमाज भयभीत
कतउ ने भेटय शान्ति छनो भरि, किओ ने भेटय मीत
रतिविपरीत आ रतिअभिसारक लिखने छह कत गीत
आब न शृंगारक जुग छइ, ने छइ कतउ सिनेह पिरीत
युद्ध,अकाल, बाढ़ि, रौदीसँ अछि जनसमाज भयभीत
कतउ ने भेटय शान्ति छनो भरि, किओ ने भेटय मीत
राजकमल चौधरी द्वारा रचित साहित्य मे सँ किछु खास राजकमलिया शैली ,प्रतिभा आ दृष्टि सँ डूबल कवितांश..........
1
कत’ जाउ ? की करू ??
रावण बनि ककर सीताकें हरूं ?
रावण बनि ककर सीताकें हरूं ?
2
एकटा रसिक स्त्री हमरासँ अनचिन्हारि
हमरा हृदय कारी अन्हारमें पियासल पाखी जकाँ अपस्याँत,
ताकि रहल अछि पानि
हमरा हृदय कारी अन्हारमें पियासल पाखी जकाँ अपस्याँत,
ताकि रहल अछि पानि
3
सभटा अंकित अछि एहि लाल बहीमे
एहि लाल बहीमे सभटा इच्छा, समग्र वासना
जे जतबा अछि जकरासँ लेन-देन
जे रखने छी हेम-नेम
एहि लाल बहीमे सभटा इच्छा, समग्र वासना
जे जतबा अछि जकरासँ लेन-देन
जे रखने छी हेम-नेम
(बही-खाता
4
काव्यक शवपर अहाँक मैथुनी आसन हम सभ नहि छीनि लेब!
मृदु, ललित स्वरेँ विविध रागमे मादक अलापसँ
अहाँ गबै छी, से मधु-गायन नहि छीनि लेब!
पुरखा छलाह मैथिल-कोकिल विद्यापति महाराज
विपुल नितम्ब अति बेकल भेल, पालटि तापर कुन्तल देल
उरज उपर जब देहल दीठि, उर मोरि बइसल हरि करि पीठि
अहाँ लाज जुनि करू, कि सदिखन काव्यक फोलू कंचुकी, नीवी,
दूरहिसँ हम्मर शत-शत प्रणाम, हे महाकवे कवि-सम्मेलन-जीवी!
मृदु, ललित स्वरेँ विविध रागमे मादक अलापसँ
अहाँ गबै छी, से मधु-गायन नहि छीनि लेब!
पुरखा छलाह मैथिल-कोकिल विद्यापति महाराज
विपुल नितम्ब अति बेकल भेल, पालटि तापर कुन्तल देल
उरज उपर जब देहल दीठि, उर मोरि बइसल हरि करि पीठि
अहाँ लाज जुनि करू, कि सदिखन काव्यक फोलू कंचुकी, नीवी,
दूरहिसँ हम्मर शत-शत प्रणाम, हे महाकवे कवि-सम्मेलन-जीवी!
(तथाकथित परम्परावादीक प्रति)
शत शत नमन
शत शत नमन
Tuesday, 23 May 2017
02 05 2017
औझका डायरी
काल्हि ऊ लता मंगेशकर बन’ चाहैत छलखिन ,परसू किशोरी अमोनकर ,आइ ऊ एकटा आई0ए0एस0 अधिकारी बन’ चाहैत छथिन ।सामंती मानसिकता सँ भरल एकटा मैथिल परिवारक ई प्रवृत्ति प्रगतिशील त’ कदापि नइ ,हँ पतनशील कहबा सँ बचि रहल छी ।बच्चाक शैक्षिक आ कैरियर चुनबा संबंधी स्वतंत्रताक सम्मान करैतो ,गार्जियनक आ समाजक प्रेरणा कें की कहल जाए ? कत लता जी आ कत’ एकटा सामान्य अधिकारी ,मुदा एकटा अर्धआधुनिक समाजक ई खास निशानी अछि ।ललबत्ती आ हूटर दिस निहारैत समाज....
काल्हि ऊ लता मंगेशकर बन’ चाहैत छलखिन ,परसू किशोरी अमोनकर ,आइ ऊ एकटा आई0ए0एस0 अधिकारी बन’ चाहैत छथिन ।सामंती मानसिकता सँ भरल एकटा मैथिल परिवारक ई प्रवृत्ति प्रगतिशील त’ कदापि नइ ,हँ पतनशील कहबा सँ बचि रहल छी ।बच्चाक शैक्षिक आ कैरियर चुनबा संबंधी स्वतंत्रताक सम्मान करैतो ,गार्जियनक आ समाजक प्रेरणा कें की कहल जाए ? कत लता जी आ कत’ एकटा सामान्य अधिकारी ,मुदा एकटा अर्धआधुनिक समाजक ई खास निशानी अछि ।ललबत्ती आ हूटर दिस निहारैत समाज....
11 05 2017
औझका डायरी
वंशीधर जी नइ रहला ,हुनका यादि करैत कलम रूकैत अछि आ कलम रोकला सँ घोर कृतघ्नताक बोध होइत अछि । गंभीर मुसकियान आ आद्यांत विनम्रताक संग एकटा दुर्लभ प्रजातिक लोक ।सहजताक सर्वसुलभ उदाहरण आ सुशीलक मानदंड.......विनम्र श्रद्धांजलि ।
22 05 17
औझका डायरी
उमेर लगभग सत्तर साल । भोरे भोर पांच बजे उठनए ।नित्यक्रिया उपरांत एकटा चाय ।टहलैत-टहलैत दूध आननै ,फेर एकटा चाय ।कनेक योग , मोन कें संतुष्ट करै वला एक्सरसाईज (देह कें नइ) ,दू-चारि टा भक्ति गीतक आनंद पुरनका फिलिप्स रेडियो सँ ।सतुआ पीनए ।चौक दिस घूमि के दस खिल्ली पान खरीदनए , दिन भरि चबेनए ।दस-ग्यारह बजे स्नान फेर भोजन ।लगभग दू घंटा अराम एही बीच किछु फिल्मी गीत आ किछु मैथिली लोकगीतक आनंद,फेर उठनए ,दरभंगा रेडियो स्टेशन खूजबाक प्रतीक्षा ,एकटा चाय ,तीन-चारि टा गीत ,कम सँ कम चालीस साल पुरान होए ,रौद कम हेबाक प्रतीक्षा ,छाहरि बरहैत देखि आंगन सँ बाहर भेनए ,मंदिर दिस ,चौक दिस ,तरकारी दुकान दिस एक घंटा बीतेनए ,फेर सौंझका सात बजे वला समाचार सँ पहिले गाम पर एनए ,समाचार सुनैत या मैथिली गीत सुनैत फेर एकटा चाय ,एकरा बाद प्रादेशिक समाचारक तैयारी आ एकटा चाय ,बीच मे कुनो बच्चा (बेटा या पोता) क’ फोन आबि गेलै त’ बतियेनए ,मां संग कुनो पुरनका बातक चरचा ।आब साढ़े आठ बाजि रहल अछि ,भोजनक तैयारी चलि रहल छैक ,तीन टा पुरनका गीत दरिभंगा या पटना स्टेशन सँ.....,आब सुतबा क’ तैयारी ,तमाकू ,मच्छरदानी आ पानिक गिलास......।यदि ई रूटीन चलि रहल छैक त’ बूझियौ सब ठीक-ठाक चलि रहल छैक ।
दिनांक
22 05 17
उमेर लगभग सत्तर साल । भोरे भोर पांच बजे उठनए ।नित्यक्रिया उपरांत एकटा चाय ।टहलैत-टहलैत दूध आननै ,फेर एकटा चाय ।कनेक योग , मोन कें संतुष्ट करै वला एक्सरसाईज (देह कें नइ) ,दू-चारि टा भक्ति गीतक आनंद पुरनका फिलिप्स रेडियो सँ ।सतुआ पीनए ।चौक दिस घूमि के दस खिल्ली पान खरीदनए , दिन भरि चबेनए ।दस-ग्यारह बजे स्नान फेर भोजन ।लगभग दू घंटा अराम एही बीच किछु फिल्मी गीत आ किछु मैथिली लोकगीतक आनंद,फेर उठनए ,दरभंगा रेडियो स्टेशन खूजबाक प्रतीक्षा ,एकटा चाय ,तीन-चारि टा गीत ,कम सँ कम चालीस साल पुरान होए ,रौद कम हेबाक प्रतीक्षा ,छाहरि बरहैत देखि आंगन सँ बाहर भेनए ,मंदिर दिस ,चौक दिस ,तरकारी दुकान दिस एक घंटा बीतेनए ,फेर सौंझका सात बजे वला समाचार सँ पहिले गाम पर एनए ,समाचार सुनैत या मैथिली गीत सुनैत फेर एकटा चाय ,एकरा बाद प्रादेशिक समाचारक तैयारी आ एकटा चाय ,बीच मे कुनो बच्चा (बेटा या पोता) क’ फोन आबि गेलै त’ बतियेनए ,मां संग कुनो पुरनका बातक चरचा ।आब साढ़े आठ बाजि रहल अछि ,भोजनक तैयारी चलि रहल छैक ,तीन टा पुरनका गीत दरिभंगा या पटना स्टेशन सँ.....,आब सुतबा क’ तैयारी ,तमाकू ,मच्छरदानी आ पानिक गिलास......।यदि ई रूटीन चलि रहल छैक त’ बूझियौ सब ठीक-ठाक चलि रहल छैक ।
दिनांक
22 05 17
Tuesday, 9 May 2017
औझका डायरी
औझका डायरी
ऊ कुटुम बनै वला छथिन ,मुदा दूर सँ टेलीस्कोप सँ आ लगीच मे माइक्रोस्कोप सँ निहारै छथिन ,निहारै नइ निरीक्षण करै छथिन ।निरीक्षणक आधार-विन्दु प्रेम नइ ,स्नेह नइ ,बस एक-दोसर कें नीच्चा देखेनए ।हरेक हाव-भाव ,गतिविधि ,बात-चित अहंकार सँ भरल ,हम छी नमहर त’ हम छी नमहर ।विद्वता ,योग्यता ऐ ठाम ब्रेकर बनि के ठार छैक ।जे हाथ नमस्कार मे उठै लेल रहै ,से हाथ उठै छैक दाग देखाबै लेल ।ओ सब किछु जानै छथिन(अ सँ ज्ञ तक).....ओ सब किछु बूझहै छथिन ,ओ पूरा दुनिया देखने छथिन ,हुनका रंग-रंगक आदमी सँ परिचय छैन ,ऊ आदमी कें देखे क’ चीन्ह जाइ छथिन.....।यैह गर्वोक्ति ,यैह अंडरस्टेंडिंग हुनका सहज बनेबा सँ रोकै छैक ।ऊ बुझथिन ,जरूर बुझथिन ,ताबत बह’ दियौ ,एखन बागमती मे बहुत पानि छैक ......
10/05/2017
10/05/2017
Saturday, 15 April 2017
औझका डायरी
ऊ हम्मर कुटुम
छथिन ,दियाद छथिन आ दोस छथिन।ऊ चौबीसो घंटा हेलमेट पहिरै छथिन ,केओ कुटुम देखि ने
लए ,ऊ कखनो काल एकटा अंग के बेकाम क’ दए छथिन ,कहबेन त’ सुनता नइ ,ईशारा देबै त’ रूकता नइ ,अनुमान यदि लगा लेता त’ ह्रदयहीन भेने कुशल ।ऐ रस्ता बाटे नइ ,ऐ चौक पर बाटे नइ
,दस बजे के बदला मे एगारह बजे चलता आ पांच बजे के बदला मे सात बजे लौटता
।धीरे-धीरे .....केओ देखि ने लए ।हुनकर बदलबाक कुनो अंत नइ ,नाम ,गोत्र ,गाम ,शहर सब बदलि के अपन जेबी आ अपन स्टेटिक इनर्जी कें सेव करैत छथिन । एहने केरेक्टर हमरे परिदृश्य मे नइ आहूं के
वायुमंडल मे अछि ।ऊ आ हुनका सन कतेको कतेक
अपन ओकादि बदलबाक प्रतीक्षा क’ रहल छैक । ओकादि बदलिते भाषा ,भंगिमा ,टोन ,बॉडी लैंग्वेज सब बदलि जाइत छैक
।कखनो-कखनो ओकादि आ भाषा साथ-साथ बदलैत छैक ,कखनो-कखनो ओकादि बदलबाक प्रत्याशा मे
भाषा आ टोन समै सँ पहिले बदलि जाइत छैक आ ओकादि बाद मे बदलै छैक ।कखनो काल
दुर्भाग्य सँ भाषा त’ बदलि जाइत छैक ,मुदा ओकादि बदलबाक प्रक्रिया मे ब्रेक लागि जाइत छैक
(दिनांक 15-04-2017)
(दिनांक 15-04-2017)
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