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Sunday, 30 June 2013

भगवान ,मड़ुआ आ मिथिला

आ भगवानो के पता रहेन
जे ऐ देश के मड़ुए बचा सकत
एहेन फसिल जे रौदी आ बरखा के किछु नइ गुदानै
एहेन जे भेलियै बरसा तैयो नीक
आ नइ भेलियै तैयो तहिना
एहेन सक्‍कत कि गिरियो के तहिना
एहन चिक्‍कन कि जांतो के पकडि़ मे नइ आबै
ने लाल ने कारी
आ मड़ुओ विदा भ' गेलै मिथिला सँ
जेना कि बहुतो चीज निपत्‍ता भ' गेलै
जेकर नाम रेड डाटा बुको मे नइ

हे खेसारी

खेसारीक खेती बस सरकारे रोकलकए
गाम-समाज मे एखनो बाऊग -रोपनी
खेत-पथार मे एखनो कमउनी
आ एखनो छीम्‍मी मे एहिना दाना भरौनी
तहिना कटनी आ तहिना दौनी
ई निखिद्ध ओहिना थारी मे
ओहिना हमर देह आ खून मे
हमर भाषा मे
'बूरि खेसारी नहितन'
आ जे असल मे खेसारी रहै
सएह दोसर के खेसारी कहै
आ असली खेसारी
राहडि़क छिलका पहिर
बनल रहै तीमनराज
आ करैत संक्रमण
पसारैत रोगक प्रोटीन

मकई जिंदाबाद

मकई क' गाछ क सबसँ ऊपर नाम-नाम फूल
जेना सिपाही क' कनटोप
आ देह पर पसरल हाथ भरिक पात
जेना सिपाहीक डांर पर राखल अस्‍त्र
आ बीत-डेढ़ बीतक बाइल
जेना गस्‍सल गस्‍सल कारतूस
खेत मे सजल लाईन मे गाछ
जेना युद्ध सँ पहिलेक सिपाही
आ हे मिथिले
ई सिपाही मिथिलाक दारिद्रय दुख के लीलिए कें मानत
आ यादि करू पूसा
यादि राखू मसीना
ई थिक मिथिलाक नया खजाना
जत' जनमि रहल मिथिलाक नवपूत सपूत
जत' बाउग भ' रहल
पलटन क पलटन
सेना
जे एकदम कटिबद्ध
दुर्भिक्ष सभक विरूद्ध
आब देखियै ने कते जान कोशी मे
रौदी ,दाही झौंसी मे
जय मिथिला ,जय मसीना ,जय मकई
आ मेंहका चाउर के मुर्दाबाद नइ कहितौ
जिंदाबाद केना कहियै
जखन कि ई हरदम जियेने रहलै
बस एक आना मिथिला के

Wednesday, 26 June 2013

ई माटि

वौआ जोर-जोर सँ चिकरैत छैक
ई मिथिला ओकर ,ई महाराष्‍ट्र ओकर
ई दिल्‍ली ओकरे ,ई पटना ओकरे
वौआ पेंसिल सँ घेरैत छैक
मिथिलाक नक्‍शा ,बिहारक नक्‍शा
माओ-चीनक आ हिटलरक नक्‍शा
वौआ गोर लागैत छैक ,वौआ चूमैत छैक
माटि के
ओ धरती कें मां-‍बहिन कहै छैक
देवी मां मानै छैक
आ संबंधक ऐ जाल मे बिसरै छैक
जे ई धरती आरो बहुत चीजक छैक
ओकरा पता नइ छैक
जे चट्टान रौद,हवा आ पानि के सहैत हजारों साल
तियागै छैक अपन रूप
ओकरा पता नइ जे तिब्‍बत आ चीनक असंख्‍य भूखंउ
अपन रूप बदलैत हेलैत डूबैत
पहुंचै छैक बंगाल तक
ओकरा पता नइ छैक
एक इंच माटिक लेयर बनै मे
गुजरि जाइछ छह टा शताब्‍दी
मतलब बारह पीढ़ी
आ कतेको राजवंश

Friday, 21 June 2013

’सगर राति‍ दीप जरय’क ७९ म आयोजन ‘कथा कोसी’ उमेश पासवानक संयोजकत्‍वमे औरहामे सम्पन्न/ ८० म सगर राति‍ दीप जरय सुपौल जि‍लाक निर्मलीमे उमेश मण्‍डलक संयोजकत्वमे - रिपोर्ट पूनम मण्डल

सगर राति‍ दीप जरय’क 79म आयोजन ‘कथा कोसी’ नामक वैनरक नीचाँ दि‍नांक 15 जून संध्‍या 6.30 बजेसँ शुरू भऽ 16 जूनक भि‍नसर 6 बजे धरि‍ लौकही थाना अन्‍तर्गत औरहा गामक मध्‍य वि‍द्यालयक नव नि‍र्मित भवनमे श्री उमेश पासवानक संयोजकत्‍वमे गोष्‍ठी सुसम्‍पन्न भेल। अगि‍ला ८०म गोष्‍ठी सुपौल जि‍लाक निर्मलीमे हेबाक लेल उमेश मण्‍डल प्रस्‍ताव आएल जे सर्वसम्मति‍सँ मान्‍य भऽ घोषित भेल।
      श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल एवं श्री रामचन्‍द्र पासवान जीक संयुक्‍त  अध्‍यक्षतामे तथा श्री वीरेन्‍द्र कुमार यादव आ श्री दुर्गागान्‍द मण्‍डलक संयुक्‍त  संचालनमे ऐ कथा गोष्‍ठीक भरि‍ राति‍क यात्रा भेल। गोष्‍ठीक  शुभारम्‍भ श्री लक्ष्‍मी नारायण सिंह एवं श्री रामचन्‍द्र पासवानजी संयुक्‍त रूपे दीप प्रज्‍वलि‍त कऽ  उद्घाटन केलनि‍।
      वि‍देह-सदेह-5 वि‍देह मैथि‍ली वि‍हनि‍ कथा, वि‍देह सदेह-6 वि‍देह मैथि‍ली लघुकथा, वि‍देह-सदेह-7 वि‍देह मैथि‍ली पद्य, वि‍देह-सदेह-8 वि‍देह मैथि‍ली नाट्य उत्‍सव, वि‍देह-सदेह-9 वि‍देह मैथि‍ली शि‍शु उत्‍सव तथा वि‍देह-सदेह-10 वि‍देह मैथि‍ली प्रबन्‍ध-नि‍बन्‍ध-समालोचना नामक पोथीक लोकार्पण स्‍थानीय वि‍द्वतजन श्री संजय कुमार सिंह, श्री रामचन्‍द्र पासवान, श्री मि‍थि‍लेश सिंह, श्री राजदेव मण्‍डल, श्री लक्ष्‍मी नारायण यादव तथा श्री वीरेन्‍द्र प्रसाद सिंह द्वारा भेल हाथे भेल।
      लोकार्पण सत्रक पछाति‍ दू-शब्‍दक एकटा महत्‍वपूर्ण सत्रक सेहो आयोजन भेल जइमे श्री रामचन्‍द्र पासवान, श्री बेचन ठाकुर, श्री कपि‍लेश्वर राउत, श्री कमलेश झा, श्री राजदेव मण्‍डल, श्री राम वि‍लास साहु, श्री उमेश नारायण कर्ण, श्री रामानन्‍द झा ‘रमण’, श्री शंभु सौरभ, श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, डॉ शि‍वकुमार प्रसाद, श्री अरूणाभ सौरभ तथा श्री उमेश मण्‍डल तथा संयोजक श्री उमेश पासवान द्वारा ‘सगर राति‍ दीप जरय’ कथा गोष्‍ठीक दीर्घ यात्रा तथा उदेसपर सभागारमे उपस्‍थि‍त दूर-दूरसँ आएल कथाकार, समीक्षक-आलोचक एवं स्‍थानीय साहि‍त्‍य प्रेमीक मध्‍य मंचसँ अपन-अपन मनतव्‍य  रखलनि‍। जइमे सगर राति‍क 75म आयोजनक पश्चात 76म आयोजन जे श्री देवशंकर नवीन दि‍ल्‍लीमे करेबाक घोषना तँ केने रहथि‍ मुदा से नै करा साहि‍त्‍य  अकादेमी द्वारा आयोजि‍त कथा गोष्‍ठीकेँ गनि नेने रहथि‍ जहू गि‍नतीकेँ सोझरौल गेल आ तँए ऐ गोष्‍ठीकेँ श्री उमेश पासवान अपन इमानक परि‍चए दैत ७९ म गोष्‍ठीक आयोजन केलनि‍। ओ कहलनि‍ जे हम सभ अर्थात् वि‍देह मैथि‍ली साहि‍त्‍य  आन्‍दोलनसँ जूड़ल मैथि‍ली वि‍कास प्रेमी छी। हम सभ ७७म, ७८ म आयोजनक आयोजन कर्ताकेँ स्‍पष्‍ट रूपे कहैत एलि‍यनि‍ जे मुदा हमरा सबहक बात नहियेँ वि‍भारानी मानलनि‍ आ नहि‍येँ कमलेश झा मानलनि‍। मुदा से हमहूँ नै मानब आ सही-सही गि‍नती करब। आ तही दुआरे ऐ गोष्‍ठीक आयोजन ७९मे आयोजन तँइ भेल, आयोजि‍त भेल। हलाँकि‍ दरभंगासँ आएल कथाकार श्री हीरेन्‍द्र कुमार झाक उकसेला पर रहुआसँ आएल श्री वि‍नय मोहन झा जगदीश, श्री दुखमोचन झा आ दरभंगेसँ आएल श्री अशोक कुमार मेहता हीरेन्‍द्र  झाक संग गोष्‍ठीक आरम्‍भक घंटा भरि‍क पछाति‍ चलि‍ जाइ गेला।

      जीवि‍ते नर्क (उमेश मण्‍डल), शि‍क्षाक महत (राम वि‍लास साहु), बि‍आहक पहि‍ल गि‍रह (दुर्गानन्‍द मण्‍डल), बौका डाँड़ (लक्ष्‍मी दास), बंश (कपि‍लेश्वर राउत), टाटीक बाँस (राम देव प्रसाद मण्‍डल ‘झारूदार’), सगतोरनी (शि‍वकुमार मि‍श्र), पाथर, पि‍यक्कर, जोगार आ अंग्रेज नैना (अमीत मि‍श्र), संत आकि‍ चंठ (बेचन ठाकुर), अछोपक छाप (शम्‍भु सौरभ), नमोनाइटिस (उमेश नारायण कर्ण), द्वादशा (सुभाष चन्‍द्र ‘सि‍नेही’), राँड़ि‍न (रोशन कुमार ‘मैथि‍ल’), पँचवेदी (अखि‍लेश कुमार मण्‍डल), मुइलो बि‍सेबनि (जगदीश प्रसाद मण्‍डल) इत्‍यादि‍ महत्‍वपूर्ण लघु कथा/वि‍हन‍ कथाक पाठ भेल आ सत्रे-सत्र मौखि‍क टि‍प्‍पणी आ समीक्षा भेल।
अछोपक छाप (शम्‍भु सौरभ) क समीक्षाक क्रममे श्री रमानन्द झा "रमण" कथावस्तुसँ अपन असहमति देखेलनि आ कहलनि- " नै आब ई गप नै अछि, एकटा गप एतै देखियौ, हम  रमानन्द झा "रमण" श्रोत्रिय उच्च कुलक, आ कतऽ आएल छी! उमेश पासवानक दरबज्जापर!" श्री बेचन ठाकुर  श्री रमानन्द झा "रमण"क नव-ब्राह्मणवादी सोचक  विरोध करैत कहलनि- " लोकक मगजमे अखनो जाति-पाति भरल छै, मैलोरंगक प्रकाश झा तेँ ने कहै छथि जे बेचन ठाकुर भरि दिन तँ केश काटैत रहैए, ई रंगमंच की करत!! श्रीधरमकेँ सेहो ई गप बुझल छन्हि। माने मैथिली साहित्यकार, समीक्षक आ रंगमंचसँ जुड़ल ब्राह्मणवादी आ नव-ब्राह्म्णवादी सोचक लोककेँ देखैत  ई कहल जा सकैए। २१म शताब्दीमे श्री रमानन्द झा "रमण"क बयान ई देखबैत अछि जे  कोना ओ उमेश पासवानक दरबज्जापर आबि उपकृत करबाक भावनासँ ग्रसित छथि।
अगि‍ला ८०म गोष्‍ठी सुपौल जि‍लाक निर्मलीमे हेबाक लेल उमेश मण्‍डल प्रस्‍ताव आएल जे सर्वसम्मति‍सँ मान्‍य भऽ घोषित भेल।






Wednesday, 19 June 2013

जइ फोन के सटेने रहियै डांर सँ

जइ फोन के सटेने रहियै डांर सँ
आ छुपेने करेजा मे
से सदिखन अनसोहांते कहै
राति बरबजियो के
झांटि बिहाडि़यो मे
अधपहरा भोरो मे 'व्‍यस्‍त ' कहै
आ जखन कि ओहो इंतजार करैत छली
ई बाजै कि तोहर फोन 'ओ नइ उठा रहल छओ'
सबसँ अनकत्‍थल त' तखन भेलै
जखन फोन कहै कि पूरा सृष्टि
ई नेटवर्क
आ एतबे नइ ओ सेहो व्‍यस्‍त छथिन
जखन कि सब जनैत छैक
ओ हरदम खाली छथिन
हरदम प्रतीक्षारत

Friday, 14 June 2013

लाल बूझक्‍कर

लाल बूझक्‍कर चोर के मनबै
राति अन्‍हरिए रहत
हमरा चंद्रमा सँ बातचित भेल
यैह थिक चोरएबाक समै
आ सहूकार के कहै
जागले रहब सेठजी
चोर-ऊचक्‍काक साहस बहुत बढि़ गेल
तहिना ओकील के कहै
भाय मलगर केस अछि
आ वादी कें डराबै
ओकीलबा बड्ड महगिया
आ राति के लालबूझक्‍कर खूब हँसै
कखनो अकेले कखनो कनियां लग
कखनो बालबच्‍चा लग
कखनो बाप पुरूखा लग
लोक पूछथिन 'की भेल '
तखन लाल बूझक्‍कर कुनो पुरनका मजाकक बात करै
आ थर्ड डिग्री धूर्त जँका अपनो सँ
घरवाहि सँ आ दुनिया सँ नजरि बचबै
एहनो नै जे लालबूझक्‍कर के किछु भेट रहल
आब ओकरा चलाकीक आदत लागि गेल छैक
ओ चलकिए मे जीतए
चलकिए मे मरतए
आ सही मे एकदिन ऐ दुनिया सँ
टुन्‍न‍ भ' उडि़ जेतै
ओकरा जीब' दियौ चलाकी क' एक-एक घटना संग
ओकरा भर' दियौ पापक तमघलि
ओकरा पहिर' दियौ लील टीनोपाल वला धोती
ओकरा गाब' दियौ राम रामराम
ओकरा दिय' दियौ भाषण
देश पर धर्म पर नैतिकता पर
ओकरा भाग' दियौ लकवा सँ
ओकरा बच' दियौ लकवा सँ
उँगरी बवा लाल बूझक्‍कर
पैर बचा ठेहुन बचा
बचा लालबूझक्‍कर
अपन जीभ
अपन हृदय
अपन आत्‍मा