ओकरा ,ओकरा आ ओकरा आगू बरहा आ एकरा ,एकरा आ एकर टांग खीच ।ऊ देखही ने बरा नील-टीनोपाल झारने छौ ,ओकरा दिस एक लौप कादो फेक ,देखही ने कनियो ने कनियो लागबे करतए ,नइ लागतै त' डरेबो त' करतौ आ डरा जेतओ त' कम सँ कम साइकिलक हेंडिल जरूरे खसकतै आ खसकतै त' ऊ गिरतौ ।ओकरा दिस ई ढ़ेपा ,ओकरा दिस ई छौंकी आ ओकरा दिस ई झूटकी फेक ।देखही बस खपटिए फेकबाक चाही ,डांगक युद्ध नइ थिकै ई ,नाहक केकरो लागि गेलौ त' खूनक मोकदमा हेतौ ।स्पष्ट प्रशंसा नइ स्पष्ट आलोचना नइ ,बस मुसकियाइत रहियौ ,बस....।ओकरा सटा लियौ त' ई सब फैदा ,ओकरा बजाबियौ त' ओहो आयत ।ओकरा हटेने रहू नइ त' ओ सब नराज भ' जेता ।ओकरा साथ रखबाक अछि त' रातिक एकांत मे बजाबियौ ,केओ देखै नइ ,केओ अनुमान तक नइ लगा सकै ।ई आदमी अहां के भविष्य मे काज देत ,तें एकरा ईग्नोर नइ करियौ ,कुनो ने कुनो लेई सँ सटेने रहू ।ई बरा लराकू टाईपक अछि ,एकरा आगू राखू ,ई कलम आ कोदारि सँ साथ रहत आ ई लेखक जेंका त' अछि मुदा अछि बरा चुप्पा ,एकरा एकदम पंजियेने रहू ,मंच ,पुरस्कार आ प्रकाशनक शताधिक अभियान मे एकरा सन खबास पूरा लेखक समुदाय मे नइ भेटत ।आ यदि फलनमा के धकियेबाक अछि त' चिलनमा के आगू राखू ,हम जनै छी जे चिलनमा अहांक प्रिय नइ अछि ,मुदा यदि अहां अपन प्रिय ठेकनमा के आगू करबै त'निश्चिते बूझू जे फलनमा आगू भ' जायत तें सब आदमी जोर सँ कहियौ श्री चिलनमा झा जिंदाबाद ।
मैथिली साहित्य आ मिथिलाक संस्कृति पर विमर्शक एकटा मंच ।प्राचीन गौरवशाली परंपराक पहचान आ नवीन प्रगतिशील मूल्यक निर्माण लेल एकटा लघु प्रयास ।
Followers
Wednesday, 2 March 2016
Sunday, 28 February 2016
मूसक बच्चा
मूसक बच्चा
कतौ सँ मिलि गेल रहै एकटा मूसक बच्चा ।एकदम मनुक्खक बच्चा सन ।ओहिना छोट-छोट हाथ पाएर आ मुंह ,ओहिना कखनोकाल आंखि ताकै ।भैया ओकरा रूईया मे लपेटके दौरी मे राखि देलकै आ दौरी के चार मे लटका देलकै ।इसकुल सँ एलाक बाद चुपचाप चार मे सँ उतारलकै ,मुदा हलचल बन्न रहै ।शायत असुरारि कें नीक लागल रहै.....
(रवि भूषण पाठक वाया चंदन गुहा)
कतौ सँ मिलि गेल रहै एकटा मूसक बच्चा ।एकदम मनुक्खक बच्चा सन ।ओहिना छोट-छोट हाथ पाएर आ मुंह ,ओहिना कखनोकाल आंखि ताकै ।भैया ओकरा रूईया मे लपेटके दौरी मे राखि देलकै आ दौरी के चार मे लटका देलकै ।इसकुल सँ एलाक बाद चुपचाप चार मे सँ उतारलकै ,मुदा हलचल बन्न रहै ।शायत असुरारि कें नीक लागल रहै.....
(रवि भूषण पाठक वाया चंदन गुहा)
Wednesday, 17 February 2016
ओहिना अलसाइत
ओहिना अलसाइत आबैत हेतै शिव कुमार पासवान आ ओहिना अलसाइत खोलैत हेतै पुस्तकालयक ताला ,तहिना आंखि बचबैत गामक लोक सब निकलि जाइत हेथिन खेत ,पोखरि आ गाछी दिस ।शिवकुमार सेहो हाफी लैत पूरब-पच्छिम देखैत हेतै ।आ ई जगह सूतए लेल नीक नइ...ओह किछु लोक बैंकक काज सँ आ सुस्ताबै लेल पुस्तकालयक बेंच पर बैसैत हेथिन ,किछु लोक समै बितबै लेल पूछैत हेथिन शिवकुमार सँ मौसमक हाल ,किछु आदमी ओहिना बातक क्रम बरहेबा लेल पूछैत हेथिन किछु नव छै की ....किछु आदमी डराइत हेथिन जे शिव कुमार पूछि ने दए कि किताब कहिया देबै .....
Sunday, 7 February 2016
पाद वौआ पाद
तोरो की तकदीर छौ
पाद वौआ पादराजा बहीर छै
पाद वौआ पादराजा बहीर छै
पाद वौआ पाद
नाको गहीर छै
पाद वौआ पाद
झरल ओकर शरीर छै
ताल से ताल बजा
बाहर सब शूरवीर छै
पादक जश्न मना
Monday, 1 February 2016
देखियौ
क का कि की किछुओ नइ नइ छौड़ा के टाई मुदा टाईट देखियौ
परहाई सब जेहने-तेहने कन्वेंटक हिसाब मुदा टाईट देखियौ
मरसैबो मे भउजी -काकी ,बरहर ,गुल्लरि आ भाइट देखियौ
इसकुल मने चमकैत देवाल प्लास्टिक पेंटक बस हाईट देेखियौ
बैनर-पेंटिंग सब रंगबिरही की इंटरेनेट पर साईट देखियौ
किछ आबै यै किछु बूझै छी या लेफ्ट देखियौ या राईट देखियौ
ऐथली-मेथली बस हकन लोर
देशी बोली सब कानै छै
बस अंगरेजी भाषा वर्सेस इंग्लिश मीडियम के फाईट देखियौ
परहाई सब जेहने-तेहने कन्वेंटक हिसाब मुदा टाईट देखियौ
मरसैबो मे भउजी -काकी ,बरहर ,गुल्लरि आ भाइट देखियौ
इसकुल मने चमकैत देवाल प्लास्टिक पेंटक बस हाईट देेखियौ
बैनर-पेंटिंग सब रंगबिरही की इंटरेनेट पर साईट देखियौ
किछ आबै यै किछु बूझै छी या लेफ्ट देखियौ या राईट देखियौ
ऐथली-मेथली बस हकन लोर
देशी बोली सब कानै छै
बस अंगरेजी भाषा वर्सेस इंग्लिश मीडियम के फाईट देखियौ
Thursday, 21 January 2016
आदरनीय सुरेश चौधरी जी(मास्टर साहेब)
आदरनीय सुरेश चौधरी जी(मास्टर साहेब)
प्रणाम ,आशा अछि दिनुका फोन वला संवाद अहां के यादि होयत ।आब फेर सँ फरिछा के कह' चाहै छी जे उदयनाचार्य मिथिला पुस्तकालय के चार छाड़ै लेल जे चंदा अहां मांगलौं ,से हम देबा मे असमर्थ छी ।जइ पइसा आ जइ कोष सँ अहां विद्यालयक शेष रूमक छड़ौनी करेबए तहिया कोष सँ कनेक पुस्तकालय पर सेहो ध्यान द' देबै ।आब पुस्तकालयक स्थिति अहां सँ बांचल त' अछि नइ ।अहां त' देखते हेबै जे कत्ते आदमी पुस्तकालय पर परहै लेल आबैत छथिन आ कत्ते लोक कें एकर श्रीवृद्धिक चिन्ता छै ,तखन जे हम पागल जँका पुस्तकालयक चून-सिमेंट मे पइसा लगबी से कोन लेल । की गामक सबसँ पैघ बूड़बक हमहीं छी ।यदि छीहो त' ऐ बेरूका लेल माफी ।
प्रणाम ,आशा अछि दिनुका फोन वला संवाद अहां के यादि होयत ।आब फेर सँ फरिछा के कह' चाहै छी जे उदयनाचार्य मिथिला पुस्तकालय के चार छाड़ै लेल जे चंदा अहां मांगलौं ,से हम देबा मे असमर्थ छी ।जइ पइसा आ जइ कोष सँ अहां विद्यालयक शेष रूमक छड़ौनी करेबए तहिया कोष सँ कनेक पुस्तकालय पर सेहो ध्यान द' देबै ।आब पुस्तकालयक स्थिति अहां सँ बांचल त' अछि नइ ।अहां त' देखते हेबै जे कत्ते आदमी पुस्तकालय पर परहै लेल आबैत छथिन आ कत्ते लोक कें एकर श्रीवृद्धिक चिन्ता छै ,तखन जे हम पागल जँका पुस्तकालयक चून-सिमेंट मे पइसा लगबी से कोन लेल । की गामक सबसँ पैघ बूड़बक हमहीं छी ।यदि छीहो त' ऐ बेरूका लेल माफी ।
अहीं के -.......... दिनुका फोन वला संवाद अहां के यादि होयत ।आब फेर सँ फरिछा के कह' चाहै छी जे उदयनाचार्य मिथिला पुस्तकालय के चार छाड़ै लेल जे चंदा अहां मांगलौं ,से हम देबा मे असमर्थ छी ।जइ पइसा आ जइ कोष सँ अहां विद्यालयक शेष रूमक छड़ौनी करेबए तहिया कोष सँ कनेक पुस्तकालय पर सेहो ध्यान द' देबै ।आब पुस्तकालयक स्थिति अहां सँ बांचल त' अछि नइ ।अहां त' देखते हेबै जे कत्ते आदमी पुस्तकालय पर परहै लेल आबैत छथिन आ कत्ते लोक कें एकर श्रीवृद्धिक चिन्ता छै ,तखन जे हम पागल जँका पुस्तकालयक चून-सिमेंट मे पइसा लगबी से कोन लेल । की गामक सबसँ पैघ बूड़बक हमहीं छी ।यदि छीहो त' ऐ बेरूका लेल माफी ।
अहीं के -..........
अहीं के -..........
Wednesday, 20 January 2016
नेसाने-झारू
गालेगाल पान आ कंठ दारू रहै
नाली मे गीरल सम्हारू रहै
मुह मे ओकर दुनियाजहानक बात
पीठ पर नेसाने-झारू रहै
की हँसै ,की बाजै ,कखनो कानै
की बात-बेबात बजारू रहै
सप्पत बापक भगवानक बाते-बाते
की कहौं कसमकस्स जानमारू रहै
भोर गेलै ओ मन्दिर अछिंजल लेने
सांझ भेटलै डोलैत यार चारू रहै
Subscribe to:
Posts (Atom)