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Saturday, 16 November 2013

रे खरहा

देखियौ ने रंग कत्‍ते दकदक
(रंग पर नइ जो वौआ)
आ कान केहन ठार छै
देह मे पानि त' देखियौ
खन एत्‍त' खन पार छै
(प्रशंसा लेल नइ मर)
जाग जाग खरहा ,मोंख पर मोटका बिलार छै

धूरी

चारि भाई छलौं ,तीन गोटे बाहर चलि गेला कमाई-खटाई लेल ।ई कमाई-खटाई शब्‍द हमर नइ हुनके छी ।कमाके टाल केने छथि ,मुदा ओतबे विनम्र ।विनम्रता क' पाछू चलाकी ई कि केओ मांगि न दए ।हरदम लोने क' चर्चा करता ,हरदम बीमारिए क' ,हरदम घाटा क' चर्चा करता ।अपने नइ कनियां आ छोट-छोट बच्‍चा सब सेहो एकदम रटल-रटाएल पटकथा आ संवाद तक रहता ।
आब आबी असली चर्चा पर ।तीनू गोटे चलि गेला गाम छोडि़ कें ,कहि के ई गेला कि अहां के करोड़ रूपया क' संपति आ ईज्‍जत-प्रतिष्‍ठा देने जाइत छी ।आ बाबू ,ई करोड़ टका एहन खतरनाक भेल कि पूछू नइ ।तीन-तीन ,चारि-चारि पुश्‍तक पुरान कुटुम सब आबि जेता आ बिना हफ्ता बितेने हटता नइ ।जत्‍ते कुटमैती क' जंजाल ,बहिने नइ दीदी आ पितामहक बहिन सब जंजाल हमरे पर ।नानी गांव आ हमर बापक नानी गांव आ बापे नइ पितामहक ननियौत सब सेहो फरिछौट करबा लेल हमरे ओहि ठाम एता ।आब बूझू जे गाम मे रहनै मोश्किल ।
छठि मे आ होली मे भाय सब सेहो पिकनिक मनेबा लेल पहुंचता ,हुनकर स्‍वागत मे कुनो कमी नइ रहि जाय ई हमर जीवनक सर्वश्रेष्‍ठ कर्तव्‍य आ कुनो गुंजाइश रहि जाय त' मृत्‍युदंड तक कमि जेतै हमरा लेल ।तहिना भाउज आ भावहु सब ,टीकमगढ़क रानी हुनका लग मे उन्‍नीस भ' जेती ।भतीजा-भतीजी सब सेहो बेस ठुनकौआ ,सब सख गामे ल' के एता ।
कहबा लेल ई कि हम धूरी छी ।हमरे पर सबक नाचनए ।हमहीं सबक केंद्र ,समस्‍त परिधि ,विस्‍तारक मूल विंदू हमही ।वाह रे वाह ,ई साहित्यिक भाषा वौआ दोसर कें कहियहीं ,बहुत रास थोपड़ी आ वाह-वाह मिलतौ ।सब सहबाक लेल हमहीं ,सब भोगबा क' लेल हमहीं ,तों सब बस भोजक निमंत्रित आ हम हरदि-हींग सँ ल' के पात-पानि तक सबक ठीकेदार ।एतबे नइ तोरा सब कें गेलाक बाद पात फेकबाक जिम्‍मेवारी सेहो हमरे ।आ यदि नइ फेक सकब त' ओइ विषेन गंध सँ के बचायत हमरा ।

Friday, 18 October 2013

खस्‍सी 2

खस्‍सी चिबाबैत रहलै
जे आगू मे रहै
ने महावीर कें यादि केलकै
ने बुद्ध के बजेलकेन
ने ओकरा हलाली के चिंता रहै
ने झटका क' दुख
कुरबानी आ बलिक आध्‍यात्मिकता पर भेनारी करैत
ओ टोनियाबैत रहलै पीपरक पात
पवित्र मानैत लोक सब सिनुर काजर लगबैत
आ आब ओ रस्‍सी ताननै बंद क' देलकै
कुनो ज्‍योतिष विद्या सँ अनजान खस्‍सी
कें पता चलि गेलै अपन भविष्‍य
जे आबै छलै जयजयकारक बीच
दोसर खस्‍सी सभ सँ
आ खस्‍सी कबीरो के बिसरि गेलै
जे कहि गेलखिन पात बकरी आ आदमी क' विषय मे
बहुत रास बात
वैह बात जे भूतिया गेलै घड़ीघंट आ अजान मे

Sunday, 13 October 2013

खस्‍सी 1

चारू खस्‍सी के शक ध' लेलकै
कि आब हमर जिनगी कें कमे दिन
चारू खेनै छोडि़ देलकै
ओकरा पता चलि गेलै हरियर घासक मतलब
चारू क' आंखि सँ गिर' लागलै दहो-बहो लोर
चारू कें पता रहैक मंदिर-मस्जिद मे हलचलक मने की ?
आ चारू कें पता रहै कि नवमी आ बकरीद मे एके दिनक अंतर
काटै क' तरीका आ बनबैक मसल्‍ला मे जे अंतर छलै
विचारैत घिन आब' लागलै
वाह रे देवता आ वाह रे दुनिया !

Tuesday, 17 September 2013

समै बड्ड कम

सिकंदरो बूझैत रहै
समै बड्ड कम
मुदा सैनिक सब किछु आर
आ ऐ सब सँ निचैन
धरती अपने चालि चलैत रहलै
जतबे ध्रुव पर
ओतबे सूर्यक चारू दिस

Friday, 30 August 2013

चारि दिन

महीना के पूरै मे बचल रहै चारि दिन
खाता के जोड़ै मे बचल रहै चारि दिन
सब घाटा सब नफा नपल रहै चारि दिन
सब सोहाग सेहन्‍ता गँथल रहै चारि दिन
छौड़ो अलगे तूफान चिंता की चारि दिन
छौडि़यो के अलग लिस्‍ट सूतबै नइ चारि दिन
रहि रहि के मुसकाबथि कनियो ई चारि दिन
जेना गिरै ढ़ाकी सँ मौनी मे चारि दिन

मेहक बरद

खूब मेहनति कर ने वौआ
मुदा मेहक बरद जँका घूमि-घूमि
जिनगी नइ गमा
देखि लेतौ केओ भौतिकी वला
कहतौ केलौं भोर सँ सांझ
मुदा विस्‍थापन शुन्‍य
आ करिहें ओकरा संग फसाद
आ कि तियागबें परिक्रमा पथ
वैह भूस्‍सा ,वैह अनाज ,वैह गोबर
कें लतियाबैत किएक प्रसन्‍न छें
किएक या त' आव या फेर कांव
किछुओ त' नया कह
कनियो त' टटका सुना
हम रोकै नइ छियौ गेबा सँ
मुदा कुनो ढ़ंगक सुना
अइ गरमी मे अछिंजल बहा